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💠💠 होली के रंग ,,💠💠

🌸  रंग होली के, रंग कुर्सी के,         कौन सा रंग लिखूँ ? ?         अबकी होली चुनावों संग आई,        कान्हा किसके संग लिखूँ ? ?        रे रसिया ! !       कान्हा किसके संग लिखूँ ? ? 🌸 नेता नश...

💟💟💟💟💟हिम्मत है तो.....💟💟💟💟💟

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💟💟💟💟💟💟💟💟           हिम्मत है तो.... बड़ी -बड़ी खबरें छपती हैं बड़े-बड़े अखबारों में। नारी हित में बातें होती संसद, चौक -चौराहों में। हिम्मत है तो कर के दिखादो एक छोटा सा काम बन्धुवर, मेरे गाँव में बन्द करादो, दारू की दुकान बन्धुवर। उनको सुख मिलता होगा, बोतल में जहर मिलाने से। असर जहर का झेल रही है, घर में नारि जमाने से। "नारी का उत्थान करेंगे", बन्द करो ये गान बन्धुवर। हिम्मत है तो......... घर कितने बरबाद हो गए? कौन हिसाब लगाता है ? सपने कितने राख हो गये ? कौन हिसाब लगाता है? बस इन्कम के पीछे पागल क्यों अपनी सरकार बन्धुवर। हिम्मत है तो....... झूठे आस्वासन दे दे कर, तुमने कितने चोट किऐ। पुनः नये झाँसे में आकर , हमने फिर से बोट दिऐ। लेकिन "शक्ति " नहीं हारी है, होगा तुमको ज्ञान बन्धुवर। अभी समय है , बन्द करादो, या झेलो नुकसान बन्धुवर। उनको शत-शत बार नमन, और उनका पद वन्दन करते है, नारी हित , सम्मान हेतु लड़, जो युग परिवर्तन करते हैं। आज पुनः उन पुरूष श्रेष्ठ का करते हैं आह्वान बन्धुवर। ...

"तिरंगा " ध्वज वन्दन

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ऐ मेरे लहराते तिरंगे ! तू ही मेरा प्राण। तू ही है मर्यादा अपनी तू ही है सम्मान । निज गौरव की गाथा है तू तू प्रतिबिंब है बलिदानों का तू ही गरिमा , तू ही महिमा तू अपनी पहचान । ऐ मेरे...... तेरा केशरिया रंग बोले न्यौछावर हो सबसे पहले तू वीरों का विजय निशाँ है जिसमें रंगते वीर जवान ।  ऐ मेरे..... श्वेत, स्वच्छ छवि मध्य विराजे विश्व शांति का दे सन्देश हम हैं एक ,धरा यह अपनी परम सत्य का होता ज्ञान। ऐ मेरे..... हरित धरा सा हरित वर्ण है सुख -समृद्धि,धन-धान्य निधि स्वतंत्रता मंथन का अमृत तू नव चेतन, नयाँ विहान। ऐ मेरे.....

श्रीकृष्ण एक मनोभाव

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 श्याम सूने हृदय तट पर बाँसुरी ऐसी बजाओ हों तरंगित भाव उर के और तुम नैनों में आओ । फिर जहाँ तक दृष्टि जाए फिर जहाँ तक सृष्टि छाए अन्त क्या, आरम्भ क्या हृद शान्त सर में मुस्कुराओ । हो गई राधा भी पूजित श्याम तेरी प्रीत से जो न होते तुम प्रणेता इस अनोखी रीत के। कौन ?नैनों की समझता कौन ? दिल की, बिन कहे द्वार पर मैं भी खड़ी हूँ दीप हाथों में लिए । 

🌈🌈बेटियां बड़ी हो जाती हैं🌈🌈

🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆 कब रुकती हैं नदियों सी ये चंचल ,शीतल सी वेगमयी । "रुक जा, मत कर" कहते-कहते बेटियां बड़ी हो जाती हैं । माँ-पिता की आँखों का तारा चिंता, पीड़ा, जल आँखों का । बहती आँखें रुकत...

15 जून

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मन्द , मन्थर चाल से आ ऐ सखी , वर्षा प्रिये ! ! सूखकर विह्वल है धरती विकल है तेरे लिए ।                वन पुकारे, जन पुकारे                 पशु , जगत - चेतन पुकारे                 आ झमाझम , तू भिगा दे                   प्राण हैं तेरे सहारे । पर इजाजत बादलों को इस कदर देना नहीं दर्प है उड़ने का इनको फट न जायें ये कहीं ।             इनका आना , गड़गड़ाना             जी डरा देता सखी             दिल कहाँ भूला अभी             "केदार " जैसी त्रासदी ।

मस्त बुढ़ापा

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अनुभवों के ताप से तो बुद्धि पकती है सदा उम्र बढ़ते वक्त का अंजाम जानिए । बदन की झुर्रियां हटाकर देख लो भीतर अगर दिल मिलेगा आज भी नादान जानिए। हसरतें तो आज भी कागज की कश्ती सी ही हैं बुलबुलों पर तैरता जहान जानिए । मस्त अब भी हैं सनक अपनी लिए दूसरी दुनिया से है अन्जान जानिए । अब उतरना और चढ़ना हो गया जिन्दगी आराम का   मैदान जानिए । कौन कहता है कि खाली हो गये पास  अपने और का सामान जानिए ।