मस्त बुढ़ापा
अनुभवों के ताप से तो बुद्धि पकती है सदा उम्र बढ़ते वक्त का अंजाम जानिए । बदन की झुर्रियां हटाकर देख लो भीतर अगर दिल मिलेगा आज भी नादान जानिए। हसरतें तो आज भी कागज की कश्ती सी ही हैं बुलबुलों पर तैरता जहान जानिए । मस्त अब भी हैं सनक अपनी लिए दूसरी दुनिया से है अन्जान जानिए । अब उतरना और चढ़ना हो गया जिन्दगी आराम का मैदान जानिए । कौन कहता है कि खाली हो गये पास अपने और का सामान जानिए ।