15 जून
वन पुकारे, जन पुकारे
पशु , जगत - चेतन पुकारे
आ झमाझम , तू भिगा दे
प्राण हैं तेरे सहारे ।
पशु , जगत - चेतन पुकारे
आ झमाझम , तू भिगा दे
प्राण हैं तेरे सहारे ।
पर इजाजत बादलों को
इस कदर देना नहीं
दर्प है उड़ने का इनको
फट न जायें ये कहीं ।
इस कदर देना नहीं
दर्प है उड़ने का इनको
फट न जायें ये कहीं ।
इनका आना , गड़गड़ाना
जी डरा देता सखी
दिल कहाँ भूला अभी
"केदार " जैसी त्रासदी ।
जी डरा देता सखी
दिल कहाँ भूला अभी
"केदार " जैसी त्रासदी ।

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