"शब्द और वो"

          
'आहिस्ता'
शब्द नहीं है उसके लिए
क्योंकि वह
पहाड़ी नदी है
उड़ता झरना है
क्योंकि उसे अभी
मीलों तय करना है
वह चली है
रिसता
मटका लिए
आहिस्ता शब्द
नहीं है उसके लिए।
उसे तो पैदा होते ही
सयानी हो जाना है
ससुराल जाना है
घर सम्भालना है
जवानी में
बूढी  हो जाना है
पत्थरों के सीने पर
कुछ निशान बनाकर
मिट्टी में
पसीना उगाकर
मेहनत की खुशबू देकर
चले जाना है
आँखों में कई कई
सपने लिए
आहिस्ता शब्द
नहीं है उसके लिए।

Comments

Popular posts from this blog

💠💠 होली के रंग ,,💠💠

श्रीकृष्ण एक मनोभाव

"तिरंगा " ध्वज वन्दन