कामकाजी माँ
परंपरागत माँ से
थोड़ा अलग होती है , कामकाजी माँ।
कुछ-कुछ पिता की तरह
कुछ माँ की तरह होती है, कामकाजी माँ ।
घर और दफ्तर के बीच पिसी हुई
न जाने कितनी कसौटियों पर कसी हुई
नाप-तौल कर चलती हुई
गिर जाय तो
खुद सम्भलती हुई
घर और बाहर का संतुलन साधती हुई
खुद ही मुसाफिर और
खुद ही डगर होती है , कामकाजी माँ।
पति और बच्चों के बीच
स्वयं और समाज के बीच
आदर्शों और आदेशों के बीच
भावनाओं और सम्भावनाओं के बीच
निरंतर खिंचती, टूटती
और फिर जुड़ जाती, ऐसा
" अनोखा "रबर होती है, कामकाजी माँ ।
दुरुस्त करना हो घर का बजट
या टाइम टेबल बनाना हो
काम का बँटवारा करना हो
या कम खर्च में
अधिक फायदा लाना हो
कुछ घटाना बढाना ,या फिर
बदलना, सजाना हो
खूब गुस्सा करना और फिर
मान जाना हो
घर -घर की
ब्रेकिंग खबर होती है, कामकाजी माँ ।
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